Saturday, August 22, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- गणेश चतुर्थी

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ. ग.)
 विधा-छंद मुक्त कविता
  (लोकोक्ति का प्रयोग)
 विषय-गणेश चतुर्थी



गौरी के लाला
 शिव का प्यारा
अद्भुत अनुपम 
जग में न्यारा।

सरल सहज 
सौम्य परिवारा
मूषक वाहन
गिरजा सुत प्यारा।

वक्रतुण्ड,बुद्धिदायक 
तुम कहलाये
गौरी सुत गिरजा के
लाल कहाए।

तुम्हारी बुद्धि से
जग तर जाता
मोदक का भोग
तुम्हें है भाता।

रिद्धि सिद्धि
तुम संग सोहे
शुभ लाभ
जग का मन मोहे।

तुम्हारी कृपा से करते,
  हर कार्य का श्री गणेश,
   दिन दूनी रात चौगुनी
  आशीष मिलता अशेष।

विघ्नहर्ता बुद्धिदाता
करते नमन
हर संकट में करते
 तुम्हें वंदन।

भाद्रपद शुक्लपक्ष
चतुर्थी तिथि आई
गणेश चतुर्थी की
सबको बधाई।


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