ग्राम - बुलाँकी
जिला - रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा - कविता
शीर्षक - "गणेश वंदना"
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*गणेश वंदना*
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हे गणपति देवा, विघ्न विनाशक,
करुं मैं वंदन हर्षित होकर।
तेरी महिमा की, गरिमा बखानूँ,
तेरी वैभव को मैं पहचानूँ।
अग्रज देवा, पुण्य फल मेवा,
करूं मैं नित तुम्हारी सेवा।
हरो धरा की कलुषित व्याधा,
करो कल्याण तुम्हे जो ध्याता।
परम् पूज्य हो जन-जन मन में,
अग्रज पूज्य हो तुम जग में।
करूं मैं बंदन ध्यान तुम्हारी,
जग का कल्याण करो मंगलकारी।
पार्वती की आंँखों का तू तारा,
शिवजी का सूत है तू प्यारा।
तुझसे बढ़कर कोई नहीं न्यारा,
तुझे खुश हो पूजे जग सारा।
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उर्मिला सिदार
रायगढ(छ.ग.)
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