स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता (उल्लेख अलंकार का प्रयोग)
शीर्षक -"जीवन "
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जीवन की परिभाषा
ना हो सकी पूरी अभिलाषा
जितनी मुंह उतनी बात
पर यह है ईश्वर की सौगात
जीवन के कई पड़ाव हैं
बचपन,जवानी का जोश
जब तक समझ पाते
डूबने लगता होश है
जीवन एक संघर्ष है
कोई स्वीकारता सहर्ष है
कोई कहता पथ है और
कोई हांकता रहता रथ है।
जीवन के हर पड़ाव को
तल्लीनता से जीना सीखो
सुनो सबकी करो मन की
जीवन धारा में बहाना सीखो
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उल्लेख अलंकार:-कोई कहता पथ,कोई हांकता रथ ,कोई संघर्ष करता ,कोई स्वीकारता सहर्ष।
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