नाम-पुष्पेन्द्र शुक्ला "पुष्पराज"
जिला- जशपुर छत्तीसगढ़
विषय- कृष्ण हमारे प्राण अधारे
नटखट,बाल-गोपाल,प्यारे,
धरा पुण्य कर,देवकी को तारे।
यशोदा-नंद,वृन्दावन के दुलारे,
कृष्ण हमारे प्राण अधारे ।।
ग्वालों संग कई खेल रचाए,
गईया-बछड़ा,खूब चराए ।
लुका-छिपी में मईया बोले,माखनचोर तू कहाँ रे,
कृष्ण हमारे प्राण अधारे ।।
गोपियों के मनमोहक पल में,
गोकुल के हर संकट क्षण में ।
सुदामा बने, प्रिय सखा रे,
कृष्ण हमारे प्राण अधारे ।।
बड़ दाउ संग कंस को मारे,
मधुवन बने, मथुरा के नजारे ।
धन्य भाग, मातृ-पितृ तुम्हारे,
कृष्ण हमारे प्राण अधारे ।।
मीरा बावरी हुई,राधा झूमे,
रुक्मणी संग ब्याह रचाए ।
कई पटरानियों के बने सहारे,
कृष्ण हमारे प्राण अधारे ।।
गीता के उपदेश में तुम हो,
बांसुरी की हर तान में तुम हो ।
वासुदेव,गिरिधर,पीतांबर,
मुरलीधर कई नाम है थारे,
कृष्ण हमारे प्राण अधारे,
कृष्ण हमारे प्राण अधारे ।।।।
@पुष्पेन्द्र शुक्ला, जशपुर नगर
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