जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
शीर्षक - " श्री गणेश जी "
विधा - छंदमुक्त कविता
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प्रथम पूजा आपकी होती,
गौरी पुत्र गणेश।
पिता तुम्हारे महादेव हैं,
भाई कार्तिकेय विशेष।।
सूंड आपके बहुत लंबे,
मूषक की करते सवारी हो।
भाद्र माह में आगमन होता,
मेरे गणपति आज्ञाकारी हो।।
मोतीचूर का भोग लगाते,
संतजन सेवा गाते हैं।
श्रद्धापूर्वक भक्ति करके,
मनवांछित फल पाते हैं।।
विघ्न के तुम हरने वाले,
विघ्नहर्ता कहलाते हो।
सुखकर्ता तुम ही हो सबके,
दुःख भी सबका मिटाते हो।।
मैं बालक बहुत नादान,
वंदना तुम्हारी करता हूँ।
चरणों में तेरे हे गणराज,
अपना शीश् रखता हूँ।।
भूल-चूक को क्षमा करना,
दिल में भक्ति रखता हूँ।
अंतःहृदय से मैं तुम्हारा,
नाम हर पल जपता हूँ।।
नवीन कार्यों में सब याद करते,
श्री गणेश तुम्हीं से करते हैं।
मनोकामना सबकी पूर्ण होती,
घर-घर जयकारा लगते हैं।।
महामारी के इस तूफान में,
हिम्मत अपनी रख सकूँ।
कोरोना को परास्त करने,
मैं उससे लोहा ले सकूँ।
Very nice
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