Friday, August 14, 2020

बालोद से शैलेन्द्र चेलक की रचना- स्वतंत्रता दिवस

रचनाकार - शैलेन्द्र चेलक
पता - पेंडरवानी , बालोद ,छत्तीसगढ़
शीर्षक - स्वतंत्रता दिवस मनाए हम

स्वतंत्रता दिवस मनाएँ हम
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स्वतंत्रता दिवस मनाएँ हम ,
वीरो के गुण गाये हम ,
दासता मिटाने जान गवां दिए जो ,
उन पर बलि - बलि जाएं हम ,
स्वतंत्रता .....

थी कभी सोने की चिड़िया ,
सजी - धजी सी इक गुड़िया ,
फूट डालकर फिरंगियों ने ,
लगा दी दासता की बेड़ियां ,
अब बेड़ियाँ तो टूट गए ,
पर भाईचारा छूट गए ?
आओ मिलजुलकर अमन फैलाये हम , स्वतंत्रता ......

चुनौती हर दशक में नया - नया ,
कभी गरीबी होती नही बयां ,
कभी आधुनिकता के अंधे ,
भ्रष्टाचार- घूसखोरी  धंधे ,
कुछ नेक बंदे हैं ,
कुछ राजनीति वश गंदे है  ,
गंदगी दूर भगाए हम , स्वतंत्रता ..

रोजगार की मारामारी है ,
कहीं कालाबाजारी है ,
किसान मजदूर हो चला ,
उनकी विवशता लाचारी है ,
नई सोच से सबके हित ,
स्वरोजगार सृजाएँ हम , स्वतंत्रता ..

सीमा पर युद्व विराम नही ,
सेना को आराम नही ,
पड़ोसी नासमझ , न समझे तो,
चुप रहना काम नही ,
सेना को और सबल बनाये हम ,
दुश्मन को सबक सिखाये हम , स्वतंत्रता ....

अमन का दूत रहा भारत ,
शांति अवधूत रहा भारत ,
फैलाए जग में जो मानवता ,
प्रेम मजबूत रहा भारत ,
प्रेम बढ़ाकर  ,जग में छा जाएं हम , स्वतंत्रता .....
 
       - -  शैलेन्द्र चेलक - -

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