Wednesday, August 26, 2020

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- जलवा

रचनाकार -उर्मिला सिदार 
ग्राम -बुलाँकी 
जिला -रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
विधा -गीत
शीर्षक -"तेरी जलवा"
 

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            *तेरी जलवा*

 सारी दुनिया तेरी जलवा मांँ,
  तुमसे बढ़कर कौन है।

 माथे पे तेरी मुकुट हिमालय,
 चरणों को धोती सागर।
 पूरब तेरी देवों की धरती,
 पश्चिम में भी सागर।
 धरती, सागर ,चाँद ओ माँ,
 तुमसे बढ़कर..........

ऊँची -ऊँंची पर्वत शिखर ,
ऊँंची -नीची पहाडी ।
झर- झर करते झरने मनोहर, कोयल राग सुनाती ।
चांँद, तारे ,फूल ओ मांँ 
तुमसे बढ़कर ........

हरी-भरी आंचल तेरी,
लह लहराती वादियाँ।
रंग बिरंगी चमन खिलती, मुस्कुराते सी कलियांँ।
सूरज ,तारे ,धरती, गगन माँ,
तुमसे बढ़कर ..........

वर्षा ऋतु हरी भरी ,
हरियाली चुनरी  ओढ़।
शीत ऋतु  सुमन खिलती,
पंछी करें किलोल।
खेत ,खलियान ,ताल ओ माँ, तुमसे बढ़कर ............

 गर्मी ऋतु तपीत धरा,
 शुष्क  पवन की वेगें।
 नदी -नाला शुष्क हो।
 तपीत ,धरा निहारे।
 अखंड धरा ,समृद्ध धरती माँ,
 तुमसे बढ़कर............

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 व्याख्या:- इस कविता में कवित्री धरा की विशेषता का वर्णन की है।
                      उर्मिला सिदार
                          रायगढ़

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