ग्राम -बुलाँकी
जिला -रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
विधा -गीत
शीर्षक -"तेरी जलवा"
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*तेरी जलवा*
सारी दुनिया तेरी जलवा मांँ,
तुमसे बढ़कर कौन है।
माथे पे तेरी मुकुट हिमालय,
चरणों को धोती सागर।
पूरब तेरी देवों की धरती,
पश्चिम में भी सागर।
धरती, सागर ,चाँद ओ माँ,
तुमसे बढ़कर..........
ऊँची -ऊँंची पर्वत शिखर ,
ऊँंची -नीची पहाडी ।
झर- झर करते झरने मनोहर, कोयल राग सुनाती ।
चांँद, तारे ,फूल ओ मांँ
तुमसे बढ़कर ........
हरी-भरी आंचल तेरी,
लह लहराती वादियाँ।
रंग बिरंगी चमन खिलती, मुस्कुराते सी कलियांँ।
सूरज ,तारे ,धरती, गगन माँ,
तुमसे बढ़कर ..........
वर्षा ऋतु हरी भरी ,
हरियाली चुनरी ओढ़।
शीत ऋतु सुमन खिलती,
पंछी करें किलोल।
खेत ,खलियान ,ताल ओ माँ, तुमसे बढ़कर ............
गर्मी ऋतु तपीत धरा,
शुष्क पवन की वेगें।
नदी -नाला शुष्क हो।
तपीत ,धरा निहारे।
अखंड धरा ,समृद्ध धरती माँ,
तुमसे बढ़कर............
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व्याख्या:- इस कविता में कवित्री धरा की विशेषता का वर्णन की है।
उर्मिला सिदार
रायगढ़
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