निवास-बैरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक-""अधूरी ख्वाहिश ""
विधा-छ्न्द-मुक्त (कविता)
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●☆>||अधूरी ख्वाहिश ||<☆●
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मेरा-जीवन--
मेरा-जन्म ,
सँसार,समाज-परिवार की धुरी,
फिर भी---
जीवन में--क्यों रहती --?
अधूरी की अधूरी ख्वाहिश ।
मुझमें वो सब,
जो तुममें है,
ज्ञान,शक्ति और जीवन कला,
धैर्य,साहस,ममता,हर कठिनाई को,
सहने की अपार क्षमता ।
मेरी बहना,अपनी अस्मिता को--
अपने आप,कुछ बनने,कुछ पाने की--
ख्वाहिश में--लुटा,मिटा रही--?
कुछ पाने की ख्वाहिश में---
अधूरी नहीं रहती हैं,ख्वाहिशे कभी भी
न ही,मिटती कभी भी--।
रखें ऐसी ख्वाहिश--
या कुछ करने की चाह,
जिसकी खुशबू और खुशी,
मिटती नहीं है कभी भी ।
फिर भी दुनियाँ में,
कुछ लोगों की--
न जाने क्यूँ रह जाती है,
अधूरी की अधूरी ख्वाहिशें ।
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व्याख्या-उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि अधूरी ख्वाहिश पूरी करने की चाहत में अपने को भूल से भी लुटा न देना ।
*********स्वरचित-प्रस्तुति •••••••••
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