स्थान :- बनाई तमनार, रायगढ़
विषय :- प्रभु गणपति
विधा :- कविता
शीर्षक :-"गण अधिपति"
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लक्ष्मी सरस्वती साथ लिए
सदा आते गणपति
जगत के सब कारज सवांरे
रिद्धि- सिद्धि के हैं पति
बोलिए प्रेम से सब मिलकर
जय गणपति जय गणपति ।
गोल मटोल है इनकी छवि
विघ्नहर्ता ये कहाते
लाडले हैं पार्वती मां के
ये हैं गण अधिपति
प्रेम से बोलिए सब मिलकर
जय गणपति जय गणपति ।
चंद्र के अहंकार तजे
असुरों के प्राण हरे
माता- पिता के चरणों में
सारा संसार हैं रखे
माता-पिता की महत्ता निखारे
उन की परिक्रमा करि- करि
प्रेम से बोलिए सब मिलकर
जय गणपति जय गणपति ।
Jai ganesha
ReplyDeleteजय गणेशा
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