Monday, July 27, 2020

रायपुर से एच-एस अरमो की रचना- कलाम

+रचनाकार-एच-एस-अरमो,अरमान ।
×निवास-बैरन-बाजार,रायपुर ।
+जिला--रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
*शीर्षक-""शख्सियत ""
÷विधा--छ्न्द-मुक्त(कविता)
डाँ-ए-पी-जे-कलाम साहब को सादर समर्पित ।विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए
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●°°•••~<|| शख्सियत ||>~•••°°●
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वो कह रहे हैं,हमसे--- -
मेरा जीवन,संघर्षों की पतवार रही,
जीवन मंझधार में,मैंने थपेडों को,
हंसते हुए सहा बहुत---।

मेरा इस पावन धरा में अवतरण--
15अक्तूबर,1931को,धनुषकोडी गाँव
रामेश्वरम् शहर,तमिलनाडु में हुआ ।
नाम मिला--अबुल पाकिर जैनुल अब्दीन अब्दुल कलाम मसऊदी ।
संयुक्त परिवार था,पाँच भाई और 
पाँच बहनें थी,तीन परिवार साथ थे ।

इनके पिता अंसार परिवार के मुखिया,
जो देते थे,किराये पर,मछुआरे को नाव
घर पर,कमाई न थी,कुछ खास,
पाँच वर्ष की आयु में,रामेश्वरम के,
ग्राम पंचायत के प्राथमिक विद्यालय 
में ही,दीक्षा -संस्कार कराया गया ।

एक बार ,उनके अध्यापक ने पाँचवीं में 
पक्षियों के उड़ने की जानकारी बताई ,
पर,छात्रों के,कुछ भी,समझ में नहीं आ रहा था,इसलिए उन सभी लोगों को,
सागर तट पर ले गए और वहाँ उड़ते--
पक्षियों को,प्रत्यक्ष दिखाया,तभी से,
बालमन में,भविष्य में"विमान-विज्ञान,
के क्षेत्र में,जाने की बात,सोच ली थी ।

उनके शिक्षक -इयादुराई सोलोमन ने,
उनसे कहा था कि--जीवन में सफलता 
तथा अनुकूल परिणाम हांसिल करने के लिये--तीव्र इच्छा,आस्था,अपेक्षा,
इन तीन शक्तियों को भली-भांति---
 समझ और उन पर प्रभुत्व रखना है।

उच्च शिक्षा के लिये,इन्जीनियरिंग की,
पढ़ाई एयरो स्पेस के क्षेत्र मे की थी ।
वे प्रोफेसर,लेखक,एयरो स्पेस इंजी-
डी आर डी ओ व इसरो में काम किये।

1962में वे इसरो में आये और 1982
में "रोहिणी उपग्रह "सफलता पूर्वक,
अन्तरिक्ष में,प्रक्षेपित करवाया था ।
"अग्नि"व "पृथ्वी"जैसे प्रक्षेपास्त्र को,
स्वदेशी तकनीक से बनाया था ।
1998में देश के पोखरन ,राजस्थान में
द्वितीय--परमाणु परीक्षण,करवाया ।


1997में इनको भारत का सर्वोच्च--
नागरिक सम्मान *भारत रत्न *पाया ।
यह सम्मान "वैज्ञानिक अनुसंधानों-- और भारत में तकनीकी के विकास में,
अभूतपूर्व योगदान के लिए प्रदत्त हुआ
पदम विभूषण,पदम भूषण,हूवर पदक
और रामानुजन पुरस्कार व सम्मान मिला,अन्य मानद उपाधियाँ प्राप्त की।

18जुलाई2002में,चयनित राष्ट्रपति--
11वे बने,कार्यकाल समाप्त हुआ--
25 जुलाई ,2007 वो तिथि बनी ।
26मई को,"विज्ञान दिवस"घोषित की।

दैनिक जीवन में अनुशासन प्रिय रहे,
शाकाहार व सादगी को अपनाया ।
कुरान व भगवद् गीता अध्ययन प्रेमी,
विद्यार्थियों के खूब चहेते हो गये थे,
समर्थ परमाणु वैज्ञानिक दर्जा पाये।

कई प्रेरक व प्रौद्योगिकियों की पुस्तक,
छात्रों व दुनियाँ के सामने लाया--
मरते दम तक,ज्ञान व शिक्षा फैलायें,
दि-27-7-15,शिलांग में,प्राण त्यागा।

आओ आज उनको दें दे,हम सब,
सच्ची विनम्र श्रद्धांजलि,अर्पित--
कर रहे हैं,उनके छायाचित्र में पुष्पान्जली,करते शत-शत नमन ।
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व्याख्या:-उपरोक्त रचना के माध्यम से महान "शख्सियत "को आज याद करें और उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके जीवन में किये गये कामों को आत्मसात करने की जरूरत है ।
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