Wednesday, July 29, 2020

कोलकाता पश्चिम बंगाल से कवि दिनेश चंद प्रसाद "दीनेश" जी की कविता -कर्म

नाम-दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश"
राज्य-पश्चिम बंगाल
शीर्षक- "कर्म"

कई योनियों के चक्कर के बाद
मिलता है ये मनुष्य तन
तो फिर क्यों इधर-उधर की बातों में
बर्बाद करें ये अनमोल जीवन
आइये कुछ ऐसा करें काम 
जिससे हो जग में अपना नाम
अपने सुकर्मों से छोड़ जाएं
अपना पद चिन्ह, कदमों के निशान
जिस पर चलकर हमारी आनेवाली पीढ़ी
जिये अपना बेहतर सुखमय जीवन।


नाम तो बुरे कर्मों से भी होता है
पर क्या किसी ने अपने पुत्र का
नाम राखता है रावण
कितना भी खराब हो किसी का वंश
कभी उसे पुकारता नहीं कहकर कंस
प्रेम त्याग और तपस्या की जोड़ी को
"दीनेश"सभी कहते हैं राम लखन
आदर्श स्थापित करने हेतु जन्मे थे
सीतापति लक्ष्मण भ्राता श्रीराम
किये कई बड़े-बड़े नेक काम
कर्म किये जा फल की इच्छा मतकर
ऐसा दिया श्रीकृष्ण ने सबको गीता ज्ञान

दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश" कलकत्ता

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