नाम - रश्मि शाही शर्मा
रायपुर, छत्तीसगढ़
शीर्षक - एक ख़त फूल के नाम
प्रिय फूल
आह!
आज सुबह ही किसी किताब से तुम गिर पड़े
और बिना किसी आवाज के खोल गए,
यादों के जाने कितने झरोखे...
बिना हवाओं के ही समेट लाए...
वो जानी पहचानी सी सुगंध...
बिना छुए ही सिहरा गए,
मेरे अंतर्तम को...
बिना किसी धुन के ही,
सुना गए मुझे कई तराने...
शायद इसलिए लोग तुम्हें छुपा कर
सहेज कर रखते हैं...
तुम्हारी ओट में बंद रखते हैं...
कुछ यादें, कोई सुगंध,
किसी की छुअन,
कई एक तराने...
इसलिए मैंने भी वापस तुम्हें कर दिया
उन्हीं किताबों के हवाले...
सहेज ली फिर से एक बार...
यादें, सुगंध, छुअन तराने....
Atisundar!!
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