Monday, July 27, 2020

देवरिया,उत्तरप्रदेश से कहानीकार डॉ कन्हैयालाल गुप्त"किशन"जी की कहानी - पार्वती

लेखक- डॉ कन्हैया लाल गुप्त "किशन"
पता- आर्य चौक- बाज़ार, भाटपार रानी, देवरिया, उत्तर प्रदेश २७४७०२
ईमेल📧 guptasar.gupta79@gmailcom

                     पार्वती

आज मै एक ऐसी महिला की गाथा लिखने जा रहा हूँ, जो दुनिया के लिए मिशाल हैं. शायद इस निष्ठुर दुनिया को पार्वती से सबक लेना चाहिए.
                      मैं बहुत छोटा था. जब कक्षा तीन चार मे पढता होगा तो मैंने देखा था, उस पार्वती को ; जिसके विधवा होने के कारण उसके सही आयु का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है. देखने से वह अत्यंत बूढ़ी लगती थी, उसका शरीर मात्र हड्डियों का ढ़ाचा था.कमर झुक गयी थी, जिससे वह हमेशा झुक कर ही चलती थी. शरीर पर सिर्फ हड्डियों को ढकने भर का मांस था लेकिन चाल में गजब की फुर्ती थी.ब्रह्म मुहुर्त में उठ जाना, दैनिक क्रिया से निवृत्त हो स्नान कर भाटपार रानी कस्बे के सभी मंदिरों का दर्शन कर आना तो उनकी दिनचर्या थी.
      गर्मी के दिनों में जब कक्षाएं प्रातःकालीन चलती तो वह फूलडलिया में छोटे छोटे आलूओं को उबाल कर थोड़ी नमक, थोड़ी लाल बुका मिर्च, कागज इत्यादि लेकर सुभाष स्कूल के सामने या मेरे चौराहे पर बेचने बेचने चली आती, यही उसका जीवन निर्वाह का आधार था. मैं भी कभी कभार ही उसका कचालू खाया होऊंगा. वह गुड़धनिया भी बेचती थी, जो आज की पीढ़ियों के लिए पहेली ही है किन्तु मैं फिर भी बता देता हूँ वह गुड़ और फरूई ( भुजिया चावल का भुजा) की बनी एक प्रकार की मिठाई थी, जिसे मैं अक्सर खरीद कर उससे खाया करता था. वह मेरी दुकान पर सामान खरीदने अक्सर आया करती थी. जैसे कि अगरबत्ती, कपूर, माचिस, तील तेल आदि लेने के लिए.
आज उसके मरे कम से पैतीस साल तो होते ही होगें परन्तु उसकी निष्कपट वाणी की याद मन को अक्सर उदास कर जाती है और यही सोचता हूँ कि उसका यह जीवन धन्य है जो नि:संतान होते हुए, अकेले बाल विधवा होते हुए भी उसने अपना जीवन कितनी सादगीपूर्ण ढंग से व्यतीत किया. आज उसकी आत्मा को मेरे तरफ से कोटि कोटि नमन, वंदन है.

रचना प्रकाशनार्थ 
डॉ कन्हैयालाल गुप्त किशन
आर्य चौक- बाज़ार ,भाटपार रानी, देवरिया, उत्तर प्रदेश २७४७०२

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...