Wednesday, July 29, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- पकवान

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
   शीर्षक  -  " छत्तीसगढ़ के पकवान "
     विधा - छंदमुक्त  
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कतका करौं मैं,
छत्तीसगढ़ के महिमा ल बखान। 
आनी बानी के खाई खजाना, 
अऊ बनथे स्वादिष्ट पकवान।। 

चाउर पिसान के पतला चीला रोटी, 
अऊ गोरसी म बनथे अंगाकर। 
पताल चटनी संग अब्बड़ मिठाथे,
भाई बहिनी संग खाथे,बिजरा बिजरा कर।। 

उरिद दार ल,जाँता म दर के
पानी म भिगो देथे। 
सील लोड़हा म पीस के पीठी बनाथे,
फेर बरा के रूप दे देथे।। 

तिहार बार म घरो घर बनथे,
जेकर नाम हे सोंहारी। 
गुरहा रोटी जेला हमन कइथन, 
बिक्कट सुहाथे मोला संगवारी।। 

चाउर पिसान ल तिपत पानी म मिलाके, 
बना ले तैं चौसेला। 
तेल म तैं छान ले कुरकुर ल, 
गपागप खा फेर तैं ऐला।। 

लंबरी लंबरी हाथ म बरके,
बनाथन हमन फरा। 
गुलगुला भजिया संग खुरमी बनाथन, 
अऊ हावय घलो मूंग के बरा।। 

चाउर ल कूटके गुड़ मिलाके,
मालपुआ ल बनाय जाथे। 
कनकी चाउर के तसमई बनाथन, 
दूध चिरौंजी ह स्वाद बढ़ाथे।। 
 
चाउर ल फूलो के बटकी म, 
दाई बनाथे अइरसा रोटी। 
चार ठिन भजिया संग ऐला जोरथे,
जब लेहे जाथे घर के बहू बेटी।। 

बेसन के ठेठरी बनाथन, 
गोल गोल गूरमेट के। 
तिल गुड़ के गुझा बनाथन, 
चूल्हा तीर म बेठ के।। 

सब्बो पकवान के नाम सुनके,
मुंहू ल लार बोहागे जी। 
अतकी कइके संगी संगवारी हो, 
मोर कविता ह घलो सिरागे जी।। 
  
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