रचनाकार:- गजेन्द्र हरिहारनो "दीप"
पता:-डोंगरगाँव, जिला:-राजनांदगाँव, (छत्तीसगढ़)
शीर्षक- सुबह का इंतजार है
न चैन न क़रार है ।
ज़िन्दगी तार तार है ।
सब कुछ थम सा गया,
बंद सारा कारोबार है।
हर तरफ देखिए,
गुबार ही गुबार है ।
चलो चलें कहीं और,
यहाँ रहना बेकार है ।
दिल दे रहा है सदा ,
मौसम खुशगवार है ।
मै तो हूं इस पार ,
तू क्यों उस पार है ।
ढलने लगी है रात,
सुबह का इंतजार है ।
" दीप" तेरी रौशनी से ,
पतंगों को प्यार है ।
गजेन्द्र हरिहारनो "दीप "
बहुत खूब आदरणीय
ReplyDeleteआप सभी सुधिजनों को सादर प्रणाम , बहुत बहुत साधुवाद 🙏🙏
ReplyDeleteBhaut sundar 🙏🙏
ReplyDelete👏👏👏
ReplyDelete🙏👏👏 very nice
ReplyDelete🤗🤗
ReplyDeleteसार्थक संदेश,समसामयिक अनुभूति। 🙂🙂
ReplyDelete👌👌👌
ReplyDeleteमेरी रचनाधर्मिता को संबल प्रदान करने वाले आप सभी सुधिजनों को सादर प्रणाम
ReplyDeleteVery nice hai mere कवि भाई गजेन्द्र हरिहारनो दीप जी 🙏👌👌✍️🖊️
ReplyDeleteवेरी नाइस नाइस है गजेन्द्र हरिहारनो दीप जी 🙏🙏🇮🇳🇮🇳
ReplyDeleteबहुत बढ़िया गुरुदेव👌👌
ReplyDelete