जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
शीर्षक - " ए पी जे अब्दुल कलाम "
विधा - छंदमुक्त
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याद वही किया जाता है,
जो यादों के अक्स गढ़ पाने में सफल हो।
सफलता वही पाता है,
जो अपने सिध्दांतों पर अटल हो।।
था वो एक श्रेष्ठ इंसान।
दिल से करूँ मैं उनका ध्यान ।।
भारतवर्ष का वीर सपूत।
जीवन उनका देश पर अनाहूत।
साधारण व्यक्तित्व के ये थे धनी,
बच्चों से लगाव इनका बहुत।।
तिरंगे पर बसती थी इनकी जान।
जान से बढ़कर देश का सम्मान।।
झुका था ये तिरंगा,
उन्हें सलाम के बाद।
नहीं आयेगा कोई और कलाम,
इस अनमोल कलाम के बाद।।
पढ़ता था नमाज मनाता था रमजान।
कहते हैं इनको मिसाइल का भगवान।।
है वही सुरमा जो,
अपनी राह बनाता है।
कोई चलता पद चिन्हों पर,
कोई खुद ही पद चिन्ह बनाता है।।
तकनीकी का था इन्हें बहुत ज्ञान।
अग्नि त्रिशूल का दिये वरदान।।
अंतरिक्ष में देश का मान बढ़ाया।
विश्व में नई पहचान दिलाया।
करके अथक अपने प्रयासों से,
खुद का मिसाइल लांँचर भी बनाया।।
वीरों की भूमि मेरा हिन्दुस्तान।
आसमान में चमके सूरज समान।।
जाति पाति से परे इनकी बातें,
दिये मानवता का ये सौगातें।
शैक्षिक प्रवक्ता बन दिये संदेशा,
अटल अमर उनकी बातें।।
चलाते थे लड़ाकू विमान।
भारत रत्न का मिला सम्मान।।
राष्ट्रपति भी थे ये अपने देश के।
राजनीति से परे देशभक्त परिवेश के।
देश सेवा में हमेशा तत्पर,
उदाहरण बने विलक्षण गुण समावेश के।।
भारत माता का ये संतान।
बढ़ाया देश का आन और शान।।
संपत्ति का लालच न इनके मन में।
न कुछ मोह इनके जहन में।
कलाई घड़ी, कुछ वस्त्र, और
पुस्तकों की गड्डी अंतिम चरण में।।
सिखाया देश प्रेम का नया ज्ञान।
सादगी का यह अमिट पहचान।।
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Very good bhaiya
ReplyDeleteTq bhai
DeleteNice ji����
ReplyDeleteThank-you Anuradha madam
DeleteSuperb yaar👌👌.
ReplyDeleteTq brother
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