नाम-दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश"
स्थान- कलकत्ता,पश्चिम बंगाल
शीर्षक- "सावन कहाँ से बरसेगा"
कैसा समय है आया
बादल पानी न लाया
सावन कहां से बरसेगा
कट गए सब पेड़ पौधे
खत्म हुई हरियाली
सावन कहां से बरसेगा
उमड़ी नहीं घटाएं
मेघ गरजा नहीं
सावन कहाँ से बरसेगा
खत्म हुए सब बन उपवन
नाचे नहीं मयूर
सावन कहाँ से बरसेगा
टर्राये नहीं कहीं मेढ़क
चमकी नहीं कहीं बिजली
सावन कहां से बरसेगा
लगे नहीं कहीं झूले
गाई नहीं कोई कजरी
सावन कहां से बरसेगा
मेले में हुए झमेले
घर में लगी आग
सावन कहां से बरसेगा
जब चली नहीं पुरवाई
मौसम ने ली नहीं अंगड़ाई
सावन कैसे बरसेगा
दादुरों ने भेंको नहीं बजाय
झींगुरों ने गीत नहीं सुनाया
सावन कैसे बरसेगा
"दीनेश"पेड़ नहीं लगाया
सबने डाल-डाल कटवाया
सावन कैसे बरसेगा
रुत हुई नहीं सुहानी
बात है बड़ी पुरानी
सावन कहां से बरसेगा
सावन कहां से बरसेगा
No comments:
Post a Comment