Wednesday, July 1, 2020

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- अलख हरि की माया

काव्य संसद
नाम-अनुरमा शुक्ला,दुर्ग
शीर्षक-अलख हरी की माया
          कभी धूप तो कभी छाया


*अलख हरी की माया*
  *कभी धूप तो कहीं छाया*
    खोज ना गली-गली तु भगवान
    वह  तो कण-कण में  समाया ।

कभी धूप कभी छांव है जिंदगी,
सुख-दुख दोनों साथ  चलेंगे,
कभी काँटे , कभी फूल मिलेंगे,
जीवन की ये  रित सहनी होगी।

कभी जीत तो कभी हार होगी,
हर हार के बाद उम्मीद मिलेगी,
मुश्किलों से डरकर रुकना नहीं,
जीवन-रुपी नैया तभी पार होगी।

आज निराशा का दौर है आया,
कल  आशा का उजाला होगा,
अलख हरी की माया,
कभी धूप तो कहीं छाया।

                  अनुरमा शुक्ला
                    दुर्ग(छ.ग.)

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