नाम - देवब्रत कर शर्मा
पता - आवास पारा जैसा कर्रा पोस्ट जैसा कर्रा चारामा जिला कांकेर छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक - यादों की हसीं तस्वीर =======/============
दामन ही छुड़ाना था तो ऐसा प्यार जताया ही क्यों था?
मेरी बांहे जंजीर सी लगती तो हाथ लगाया ही क्यों था?
तोड़ कर दिल जब दूर जाना था ए मेरे प्यारे हमसफ़र
दो कदम साथ चलने आवाज़ देकर बुलाया ही क्यों था?
किसी को दर्द देना तुम्हारी आदत है या कोई शरारत है।
मीत बना कर लूट ले जाना ऐसा भी कोई शराफत है।
तुम्हे क्या पता प्यार में दिल टूटने का दर्द क्या होता है
तुम पत्थर ही बने रहो पर तुम्हे पूजना मेरी इबादत है।।
बरसों से आस लगाये बैठे तुम भी कुछ कुछ बोल दो।
नयन नीर उर भिगोए तुम भी राज दिल का खोल दो।
हम तो लाचार थे मजबूर थे खत का जवाब न दे सके
पर तुम इतने नादान तो नहीं कि मेरा दिल टटोल लो।।
कैसे अपने जुबां से अपने दिल की बात कह सकती थी?
कैसे समझ लिया कि मैं तुम्हारे बिना भी रह सकती थी ?
काश एक बार भी मेरी आंखों में मेरा प्यार देख तो लेते
तेरे एक इशारे पर तुम्हारे लिए सारी उम्र ठहर सकती थी।।
उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच कर भी उस प्यार को तरसे हैं
बरसों के बाद आज तुम्हे सामने देख कर नैना भी बरसे है।
नदी के दो किनारे कि तरह साथ साथ रहे हम जीवन भर
जुदा हो गये अनजाने में सही फिर भी प्यार हम करते है।।
मेरी जिंदगी आंसुओं में सिमट गयी बस इंतजार ही करते हैं।
तुम्हारे लिए कोई शिकायत नहीं और ना तुमसे कुछ कहते हैं।
समझ जाओगे ये विश्वास है अब इतने नादान तो नहीं रहे,
तुम्हे देख कल जैसे मुस्कुराते थे आज भी वैसे ही हंसते है।।
तुम्हारे यादों की हसीन तस्वीर को सीने में संजोये रखा है।
गुजरे पलों के एक एक यादों के मोती को पिरोये रखा है ।
कल कोई कहानी बन कर हम लोगों के दिलों में छा जाएँ
तन की दूरी दूर ही सही पर मन को पास बिठाए रखा है।।
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