रचनाकार-एच-एस-अरमो "अरमान"
निवास-बैरन-बाजार,रायपुर ।
जिला--रायपुर छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक--**सफ़र**
विधा---छ्न्द-मुक्त (कविता)
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○•°•~सफ़र ~•°•○
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साथ अगर,
ये अजनबी,तुम्हारा होता ,
कभी,फासला न होता ,
रथी बन तुम ,
ही,आगे ले जाओगे,इस जिन्दगीं को-।
सफ़र हो, कैसा भी--
जिन्दगी का,
अक्सर बन जाता है,
वो सुहाना सफ़र ।
मार्गदर्शक हो या कोई भी साथी,
जैसे--शिक्षा-शिक्षक-शिक्षार्थी का मेल
पाकर बेहतर शिक्षा ---
खेलते अक्सर,वो कामयाबी का खेल।
अक्सर,गुजर जाते,
समय के साथ,फिर भी,
अवसर होता है,सबके पास,
तुम जान लो व चल पड़ो,उस राह,
सीखो,जीवन जीने की शिक्षा ,
सफल,हो,जायेगा सफ़र---
लक्ष्य, ऐसा ,तुम रखो तो---।
समय के पल,
सफ़र साथियों के संग,
बनते खुशियों के,
अक्सर,खट्टी-मीठी,यादों के पल,
यादें रहेंगीं---
सिर्फ इन्हीं पलों की,
बुनो तुम भी,
इक सुनहरा सपना,
चल पड़ो,उस मंजिल की ओर
और शुरु होगा,लक्ष्यार्थ सफ़र ।
"सफ़र" तो "अरमान" - - -
अनन्त-अनवरत, सागर है,
जो, आपकी- - -
जिन्दगी की,अन्तिम श्वाँसों का,
एक,सच्चा हमसफर-सा ,साथी है।।
=========इति==========
व्याख्या--उपरोक्त रचना में सच्चा दोस्त के पास होने से सारी राहें आसान हो जाती हैं और मिल जाती हैं।
=======$=मौलिक-प्रस्तुति ====
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