जिला - बलरामपुर(छ. ग.)
शीर्षक - सावन की पहली बारिश में
सावन की पहली बारिश में
तेरे संग भीगना चाहता हूँ
होटो से उतरती हुई उस
बूंद को मैं पीना चाहता हूँ।
सावन की पहली बारिश में
तुझे कस के गले लगाना चाहता हूँ
बारिश की बूंद जो तेरे जिस्म को छूती है
मैं उस बूंद की तरह तुझसे मिलना चाहता हूँ
सावन की पहली बारिश में
भिज के तू मनमोहनी लगती है
तेरे जिस्म के हर अंग से
जो बारिश की बूंदे गिरती है
मैं उसे पीना चाहता हूँ
अगर हो इजाजत तो,पलके गिरा दो
इस सावन में तेरा संग चाहता हूँ
हो इजाजत मेरी दिल की देवी की तो
तेरे हर रंग को तेरे जिस्म से निचोड़ना चाहता हूँ
सावन की पहली बारिश में
तुझे गले लगाना चाहता हूँ
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