Thursday, July 30, 2020

रायपुर से -एच-एस-अरमो की रचना- ज्ञान

>रचियता-एच-एस-अरमो "अरमान "
>निवास-बैरन बाजार,रायपुर ।
>जिला --रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
°शीर्षक:    ""ज्ञान ""       ।
•विधा:---छ्न्द-मुक्त (कविता)   ।
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      ●|||<<~•ज्ञान •~>>|||●
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ज्ञान की होत, सर्वप्रथम सीढ़ी,
माता-पिता व घर-परिवार पीढ़ी,
दूजे होवे,संगी-साथी,संसारिक सीढ़ी,
गुरु-ज्ञान है,सम्पूर्ण ज्ञानार्जन सीढ़ी ।

परा,आध्यात्मिक व वाचिक विधा साँई 
सनातन धर्म-ज्ञान की रीत चली आई,
गुरु वशिष्ठ,द्रोणाचार्य और विश्वामित्र,
राजकाज व जीने का,देते दिव्य-सूत्र ।

तप,त्याग-तपस्या से ही,मिलता ज्ञान,
निरक्षर,अज्ञानी से पूछो इसका भान,
बिन ज्ञान,जीवन-सँसार होवे,बीयाबान
गुरुज्ञान,गुरुकुल बिन होता न आसान।

ज्ञान से ही बहे,जग में भक्तिभाव धारा,
धर्म-सँस्कृति,साहित्य की अनूठी धारा,
मीरा,रसखान,भक्त रैदास,संत कबीरा,
सगुण,निर्गुण जैसी,ईश-भक्ति धारा ।

माया-मोह व परिवार,राजपाट  त्यागा,
सिध्दार्थ से गौतम बुद्ध नाम से जागा,
पा करुणा-शील,धम्मपद धर्म का पागा
मठ,मंदिर,साधु-सन्तों में,नवकार जागा ।
भारत तपोभूमि,आध्यात्म का भंडारा ,
जहाँ से निकली,धर्म-संस्कारों की धारा
अक्षर-ज्ञान,ज्ञान-विज्ञान की बहे धारा,
मिटे जग से,अन्धविश्वासों का अँधेरा ।

आओ मिलकर हम ज्ञानदीप जलायें,
जन-जन में,ज्ञान का महत्व बतावें ।
मानवों में,ज्ञान,मानवता का धर्म लावे,
जाति-धर्म,वर्ग-संघर्षों में रोक लगाये।
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व्याख्या :--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि ज्ञान ही मानव में सामाजिक व नैतिकता को जगाने में सहायक होती है ।
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