Saturday, July 18, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना:- कविता

रचनाकर- नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,जिला-कांकेर
शीर्षक -कविता
        *कविता*
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शब्दों से रचा बसा, 
भावों में पनपा,
पाषाण ह्रदय और 
हिमगिरि से फूट पड़ती,
हाँ!मैं वही कविता हूँ।

फूलों में,कलियों में खग जो 
नभ में उड़ान भरता
पँखों के परवाज लिए उड़ता,
हाँ!मैं वही कविता हूँ।
पर्वत शिखरों से बहती 
निर्झर,जलप्रपातों से 
निर्झरित उफान हूँ,
सरिता,सागर की 
लहरों में दिखती,
हाँ!मैं वही कविता हूँ।
क्षिति,जल,पावक,गगन,
समीरा के अंशो में,
जहां प्रकृति अटखेलियाँ 
भरती अंगड़ाई में,
हाँ!मैं वही कविता हूँ।
प्रेयसी के मनोभावों को 
उकेरता,वर्ण-वर्ण में मुखरित,
शब्द-शब्द में चर्चित,
हाँ!मैं वही कविता हूँ।
तब कोई सृजन कर्ता
स्वर,व्यंजन से बांधता।

जन्म लेती हूं अन्तर्मन में 
विकसित होती व्याकरण के 
नियमों में,और 
फूट पड़ती हूँ बन धारा,
हाँ!मैं वही कविता हूँ।
तब कोई सृजन कर्ता
छंद,रस ,अलंकारों से
जोड़ता।

हाँ.....मैं ....वही .... कविता....हूँ .।

*व्याख्या*-उपरोक्त कविता कविता का जन्म खान और किन परिस्थितियों में होता है।उस पर प्रकाश डाला गया है।

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    नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर, (छ .ग.)

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