रचनाकार-एच-एस-अरमो "अरमान "
निवास--रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
जिला---रायपुर ।
शीर्षक--""पर्रा भर लाई ""
विधा--कविता (छ्न्द-मुक्त )
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""***""पर्रा भर लाई ""***""
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मानव तन मिला,
ख्वाईश की ताबिर मिली,
इक पूरी होवे,
तो,करे फौरन,दूजे की तलाश,
जितना मिले--
फिर भी सोचे,मिले "पर्रा भर लाई "।
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परिवार इक ऐसा समूह,
होवे,मुखिया उसका पालनहारा ,
पर,हर आश्रितों को--
रहे,हमेशा,यही इच्छा,
मुझे,मिले सिर्फ़ "पर्रा भर लाई " ।
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गुरुकुल में----
होती ,हर शिष्यों की अभिलाषा,
मैं ,करुँ ऐसी गुरुभक्ति व सेवा,
और जीत लूँ,गुरु का हृदया ,
ताकि मिले,मुझे "पर्रा भर लाई" ।
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पर,जीवनदर्शन है---
संत-महात्मओं व दार्शनिक की दृष्टि में
इतना मिले,प्रभु मुझे---
मैं भी भूखा न रहूँ और
दूसरों की भी भूख मिटा सकूँ ,
क्या करूँगा मैं "पर्रा भर लाई "।
=========इति===========
व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि मानव जाति के लिए जीवन में "पर्रा भर लाई "की जरूरत नहीं है किन्तु लोभ-लालच में दूसरों से अधिक पाने की अभिलाषा रखता है ।
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*****मौलिक-प्रस्तुति *****
एच-एस-अरमो,रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
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