Thursday, July 23, 2020

महासमुन्द से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- सफर

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- ये सफर सुहाना हो जाए।

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दीवानो सा हाल लिए,
सफर सुहाना शुरू किया।
आए साथी राह में उन्हें,
मैंने अपने साथ लिया।
सोचा साथी कोई ऐसा,
जो हमसफ़र दीवाना हो जाए।
ये सफर सुहाना हो जाए। -२

उल्लास लिए, उन्माद लिए,
है थोड़ा सा अवसाद लिए।
कुछ खट्टी कुछ मीठी यादें,
इस सफर में साथ लिए।
जुड़े कोई ऐसी यादें,
रहे याद सदा, भले पुराना हो जाए।
ये सफर सुहाना हो जाए।-२

मौसम हो मनमोहक बड़ा,
मनवा मद से खो जाए।
मंजिल मिलने से पहले,
ना शाम कहीं पर हो जाए।
खिले सुमन उपवन में ऐसे,
जिसका महक मस्ताना हो जाए।
ये सफर सुहाना हो जाए। -२

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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने अपने जीवन के सफर का वर्णन किया है साथ ही उसने यह कल्पना की है कि कुछ ऐसा हो कि सफर सुहाना हो जाए।

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