Wednesday, July 29, 2020

लखनऊ उत्तरप्रदेश से कवि डॉ मनोज श्रीवास्तव जी की कविता- उन अज्ञानियों को समर्पित जिन्हें अपने अस्तित्व का पता नहीं

कवि डॉ मनोज श्रीवास्तव
 गोमती नगर  लखनऊ उत्तर प्रदेश 
शीर्षक-उन अज्ञानियों को समर्पित  जिन्हें अपने अस्तित्व का पता नहीं

*
तुम क्या हो और कहां से हो अपना अस्तित्व जानते हो

 क्यों तर्क कुतर्क कर रहे हो जिसका है तुमको भान नहीं
,*

आतंकी क्रूर लुटेरों ने कितने ही साक्ष्य मिटा डाले

नालंदा तक्षशिला दोनों की गौरवगाथा ज्ञान नहीं
*

अपनी ही 7 पीढ़ियों के तुम नाम नहीं बतला सकते

खुद को चाहे जो भी समझो तुम हो सकते विद्वान नहीं
*

सतयुग त्रेता द्वापर कलयुग हैं चारों युग इस दुनिया के

तुम ठहरे भीम मीम वाले हो सकता तुमको ज्ञान नहीं
*

पहले जाकर अपने पुरखों के सारे नाम जुटा लो तुम

 भगवान राम का नाम है क्या हो सकता तुमको भान नहीं
*
!
 मनोज श्रीवास्तव लखनऊ 

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