Thursday, July 9, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- तमन्ना

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छ ग
विधा कविता
शीर्षक तमन्ना

तमन्ना इंसान की,
 कभी पूरी नहीं होती।
सुबह से शाम तक,
दिन से रात तक।
दिन से महीनों तक,
महीनों से सालों तक।
तमन्ना इंसान की......
बचपन में सपने जवानी के,
देखते हैं ये बच्चें।
स्कूल की पढ़ाई को,
झंझट समझते हैं ये बच्चें।
जल्दी जवान होने की,
तमन्ना रखते हैं ये बच्चें।
जवान होने पर वहीं बचपन,
याद कर रो पड़ते हैं जवां दिल।
जवानी में अच्छी नौकरी की,
तमन्ना सभी को।
उस पर भी हर साल,
प्रमोशन की तमन्ना हैं दोस्तों।
दुपहिया हैं तो,
चार पहिए की तमन्ना है दोस्तों।
शादी हो गई तो,
बच्चे की तमन्ना।
जवानी बीत जाती है,
तमन्ना के साथ पर कमबख्त..
तमन्ना इंसान की........
जवानी बीत जाती हैं,
तमन्नाओं के साथ।
बुढ़ापा में फिर,
याद आती वो बचपन जवानी के दिन।
फिर भी तमन्ना नहीं हुई है खत्म,
बहुत कुछ बचा है जो करना है उसे अभी।
जैसे तैसे काल पास आता है,
इंसान फिर भी उससे कुछ समय मांगता है।
मजबुर है काल और इंसान है लाचार,
तमन्ना साथ लेकर परलोक सब मजबूरी बन गई है।
तमन्ना इंसान की.........
          सूर्य प्रकाश पाटिल

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