जिला:- रायगढ़ ,छत्तीसगढ़
विषय:- छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक विरासत
शिर्षक:- "मोर धरती मोर माटी"
"मोर धरती मोर माटी"
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मोर धरती मोर माटी मा,उपजे सोना महानदी के घाटी मा....
वीर नारायण संधान करे हे,डंडा गुल्ली अउ बाटी मा.....
चौरा गांव के महल मड़वा,
भदवाही के सतमहला ।
महानदी के धार बोहावत हे,
गुरतुर लागे जी गीत देवतला ।।
महतारी दिखे परसाद के चांटी मा...
मोर धरती मोर माटी मा.......
इहां के गांधी शर्मा सुंदरलाल हर,
सतनामी महंगू के बेटा घासी लाल हर ।
अब्बड़ करे हे रबिशंकर कमाल हर,
बघवा कस बालार्जुन के चाल हर ।।
मारे हे चांटा अंगरेज मन के कनपट्टी मा...
मोर धरती मोर माटी मा....
सुघ्घर हामर बोली सुघ्घर हामर भाखा,
बहुते पढ़े हन जी एकेच रुख एकेच साखा ।
संस्कृति हर नंदावत हे,
देखो सिंघनपुर अउ कबरा पहाड़ हे अनोखा ।।
आगी धराव जी राजनीति के लंगोटी मा...
मोर धरती मोर माटी मा....
भोरमदेव के सुंदर कलाकारी,
सोन कटोरा ला टोरे हे जी अंगरेज अत्याचारी ।
संभाले रखो जी कुटुमसर की गुफा ला,
अब्बड़ जुगत मा खोजे रहीस जी शंकर तिवारी।।
ज्ञान छुपे हे उही लउठी अउ सांटी मा..
मोर धरती मोर माटी मा....
नंदावत हे जी जल जंगल जइसे सनमान,
रामगढ़ के मेघदूत मा नंदा गे गुनगान ।
तीरथगढ़ अउ चित्रकोट के झरना हर जरही,
ओही बोहइया पानी के थोरकुन करो जी बखान ।।
दू रुपिया रखे रहीसे बबा हर पाटी मा...
मोर धरती मोर माटी मा....
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गुलशन खम्हारी "प्रद्युम्न"
कृपया अपनी राय अवश्य दें 🙏🙏🙏
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना����
ReplyDeleteBahoot sugghar G
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