ब्लॉक:- प्रेमनगर, जिला:- सूरजपुर, छत्तीसगढ़
विधा:- सायली
शीर्षक:-
बारिश
सावन की
भीगा खेत खलिहान
गुलजार हुई
चमन।
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भौरें
रस पीता
बैठता फूलों पर
करते सुंदर
गान।
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आम्र
बौर हुवा
कोयल देती तान
झूमता मेरा
मन।
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मोर
नाचे जंगल
सुंदर पंख फैलाये
अंत में
रोये।
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जीवन
सुख- दुःख
का है रेला
जाना है
अकेला।
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धारा
नदी की
अविरत बह रही
मंजिल की
ओर।
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कृष्ण कुमार ध्रुव " सृजन "
ब्लॉक:- प्रेमनगर
जिला:- सूरजपुर
छत्तीसगढ़
वाह्ह वाह सर जी बहुत सुंदर 🙏🙏
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