रिश्तों का भंवर
विधा... सायली
श्रीमती पदमा साहू
खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
रिश्तों
का भंवर,
अपना समझो जिसे,
पराए बन
जाते।
अभिमान
बचाने अपना
दूसरों दोष देते,
अपना भूल
जाते।
तालमेल
बैठा नहीं
पाते अपनों से,
कोषते दूसरों
को।
ससुराल
अपना समझा
बाबुल घर छोड़,
तिरस्कार वहां
समाया।
अपनों
का दर्द
गहरा लगता उसे,
बनता मेरा
पराया।
समझोगे
तुम मेरी
अंतर वेदना जब,
झांकोगे दिल
अपने।
अवगुण
देखा दूसरों
का हमेशा तुमने,
अपना भी
देखते।
अभी
जीवन जीना
बहुत बाकी संसार,
देखो रिश्ते
डगमगाएगा।
रिश्तों
का भंवर
संभल कर चलो,
दोष दिया
पछताएगा।
श्रीमती पदमा साहू खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़
Beautiful
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