निवास _ बिलासपुर
शीर्षक _ मेरे वीर जवानो
वीर रस
मेरे वीर जवानो
ये मेरे वीर जवानो तुम अपना फ़र्ज निभा जाना
मेटे वीर जवानो भारत माता के चरणों मे तुम
अपना शीश नवा जाना |जो कर्तव्य है इस देश के लिए
उस कर्तव्य को निभा जाना ||1||
घर मे एक मस्त का वादा भले तोड़ देना |
पर भारत माँ से किया वादा निभा जाना
घर मे उम्मीद लगाए अपनों को समझा जाना |
ये मेरे वीर जवानो तुम अपना फ़र्ज निभा जाना ||2||
कुछ अपनी कहना, कुछ अपनी कहना |
रिश्तो के कच्चे धागो को उम्मीद की माला बना जाना |
अपनों को सरहद से लौट आऊंगा | ये दिलासा दे जाना |
ये मेरे वीर जवानो तुम अपना फ़र्ज निभा जाना ||3||
भारत माँ की शान बनाये रखना |
भारत माता का मान बनाये रखना |
उस धरती का कर्ज चूका देना |
जिसने अपनी छाती मे तुम्हे खिलाया है |
ये मेरे वीर जवानो तुम अपना फर्ज निभा जाना ||4||
हम शांति से सोये तुम वँहा ऐसे पहेदारी कर जाना |
बच्चे, महिला, और बूढ़ो की तुम चमक बन जाना |
ये मेरे वीर जवानी तुम अपना फ़र्ज निभा जाना ||5||
देश की धरती को नमन कर तुम उसका कर्ज चूका देना |
जब बारी आये शैफ होने की तो अपना शीश चढ़ा देना ये मेरे वीर जवानो तुम अपना फ़र्ज निभा जाना ||6||
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