रचनाकार -- प्रवीण कुमार ठाकुर
जिला -- राजनांदगाँव (छ.ग.)
शीर्षक -- "शहीदों में अपना
नाम करें " !
विधा -- कविता (वीर रस)
अलंकार -- अतिसयोक्ति अलंकार
**************************
कविता :--
"शहीदों में अपना नाम करें"।
**********************
।।१।।
खत्म होना है एक रोज ए हस्ती ,
क्यों ना यारों हम ये काम करें ।
फिदा वतन में होकर हम ,
शहीदों में अपना नाम करें ।।
**************************
।।२।।
वतन परस्तों की कुरबानी का ,
तमाशाई अरे देश द्रोहियों ।
मिट कर वतन में इस तरह हम ,
देश प्रेम ए दास्तां आम करें ।।
**************************
।।३।।
आसमां ए बुलंदी की अरमां में ,
जीने वाले वीर सपूत जवान ।
नींव वतन की बन कर हम ,
निज को यूँ गुमनाम करें ।।
**************************।।४।।
हयाते जंग से मात हुए ,
अरे वो काफिर इंसान ।
खा कर सीने में हम गोली ,
न्यौता काल को सरे आम करें ।।
**************************
।।५।।
तहरीर तबाही हो ,
तकदीर में जिनकी ।
ललकार उन्हें हम रण में ,
दुश्मन को नाकाम करें ।।
**************************
।।६।।
हिन्दुस्तान की सरहद छूँ ले ,
द्रोही में ऐसी बिसात कहाँ ।
कर कलम कर नाकामी हम ,
दुश्मन का अंजाम करें ।।
**************************
रचना
प्रवीण कुमार ठाकुर
व्याख्या :---
**********
प्रस्तुत मेरी कविता "शहीदों में अपना नाम करें " पुर्णतः देश भक्ति पूर्ण वीर रस की अतिश-योक्ति पूर्ण रचना है ।जिसकी हर पंक्ति हमें देश प्रेम की ओर बरबस ही आकर्षित करती है हमें देशप्रेम का सबक सीखाती है ।।
No comments:
Post a Comment