बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक - अनोखा रिश्ता है | हमारा
विधा - कविता
अनोखा रिश्ता है | हमारा
अनोखा रिश्ता है हमारा |
ना हक़ है ना अधिकार |
ना रश्मो, ना रिवाज़ |
ना जात , ना समाज |
अनोखा रिश्ता है| हमारा ||1||
ना मिली कुंडली ना मिली |
राशि बस मिले विचार |
है |इसमें प्यार बस प्यार |
होता अगर टकरार तो,
ना होता कोई तीसरा |
ना कोई समझाने वाला|
ना कोई संभालने वाला |
दिल टूटे तो आवाज नहीं आती |
आंसू निकले तो नहीं पोछी जाती |
अनोखा रिश्ता है| हमारा ||2||
जो कभी साथ ना होंगे |
जो कभी पास ना होंगे |
बिना उम्मीद का ये रिश्ता |
बिना मांग का ये नाता |
अनोखा रिश्ता है हमारा ||3||
दर्द तो दोनों सहेंगे |
पर दर्द को साथ बाँट ना सकेंगे |
कभी मिलने को बेबस कभी,
मिलके भी चैन सकून नहीं |
कभी कोई आस नहीं |
अनोखा रिश्ता है |हमारा ||4||
रिश्ता निभा जाये बिना किसी बंधन के |
साथ दे जाये बिना किसी अड़चन के|
बस इस रिश्ते से किसी का दिल ना दुखे|
हाँ इस रिश्ते से किसी का घर ना टूटे |
किसी का किसी से साथ ना छूटे |
अनोखा रिश्ता है हमारा ||5||
भावर्थ - निस्वार्थ प्रेम का वर्णन
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