जिला :- महासमुंद
विधा :- वर्ण पिरामिड
शीर्षक :- वो वर्षा
(१)
वो
वर्षा
अबकी
सावन में
आना लेकर
प्रीत के संदेश
जो गए हैं विदेश।
(२)
वो
मेघ
सुनो तो
आओ अब
गरजकर
करो पुलकित
करो मन झंकृत।
(३)
ये
मन
ज्यों मोर
ताके नभ
आस बूंदों की
जाने कब बुझे
प्यास वसुंधरा की।
(४)
हे
बूंद
मोती सी
बरस तू
इतना सा की
ना नयन बहे
कर्मठ किसानों की।
(५)
वो
प्यारी
बरखा
भरो ताल
करदो धरा
अब खुशहाल
संवारो हाल चाल।
व्याख्या :- वर्ण पिरामिड की विधा में लिखे उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने बरखा का आव्हान करते हुए धरती की गोद में खुशहाली भरने की बात कही है।
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