Tuesday, June 9, 2020

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से नलिनी बाजपेयी द्वारा सृजनित लेख- कांकेर जिला के ऐतिहासिक धरोहर

रचनाकार -नलिनी बाजपेयी
जिला-कांकेर
      (लेख सृजन) 
विषय- जिला का ऐतिहासिक धरोहर
शीर्षक-कांकेर जिला का ऐतिहासिक धरोहर
    
       कांकेर छत्तीसगढ़ राज्य का एक जिला है।यहाँ का जिला मुख्यालय कांकेर है। कांकेर का प्राचीन नाम शिला व ताम्रपत्र लेखों में काकरय,काकैर्य, कंकर, और कांकेरअंकित है ।विद्वानों का मत है कि प्राचीन समय में कंकर ऋषि एवं श्रृंगी ऋषि का यहाँआगमन हुआ था। नगर के मध्य में दूध नदी प्रवाहित होती है ।इस नगर के दक्षिण में स्थित गढ़िया पहाड़ पुरातात्विक महत्व लिए हुए हैं। पहाड़ के ऊपर पत्थरों से निर्मित सिंहद्वार व किला यहाँ की समृद्धि शाली इतिहास की झलक प्रस्तुत करते हैं ।जिला कई ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक  धरोहरों से भरा पड़ा है ।मगर आज मैं कुछ ही धरोहरों के बारे में बात करुँगी। आइए मैं आपको कांकेर जिला का सैर कराती हूँ।

 प्राकृतिक सौंदर्य का धनी उत्तर बस्तर कांकेर बस्तर संभाग के  सभी जिलों के समानअनेक दर्शनीय स्थलों से भरा पड़ा है। यहाँ के चप्पे-चप्पे में नैसर्गिक सौंदर्य बिखरा हुआ है ।लेकिन खेद का विषय है कि भारत सरकार के पर्यटन विभाग ने छत्तीसगढ़ की पूरी तरह अनदेखी की है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बस्तर जिले पर तो कभी-कभार कोई भौतिक अथवा फोल्डर प्रकाशित हो जाता है मगर कांकेर को तो लगता है अधिकारीगण पर्यटन की दृष्टि से जिला मानते ही नहीं ।ऐसी स्थिति में पर्यटकों की जानकारी हेतु कुछ महत्वपूर्ण स्थानों का उल्लेख करना चाहती हूँ। 
1.गढ़िया पहाड़-कांकेर शहर के दक्षिण में स्थित इस पहाड़ पर प्राचीन काल में कंडरा राजा का किला था, जहाँ अनेक दर्शनीय स्थल है जिसमें सोनई, रुपई, तालाब तथा छुरी पगार गुफा,सिंहद्वार,आदि आज भी सुरक्षित और दर्शनीय स्थल है।पहाड़ की सुंदरता देख लोग दंग रह जाते है।शिवरात्रि तथा नवरात्रि में मेला का आयोजन होता है।उत्तर बस्तर कांकेर के आसपास अनेक दर्शनीय स्थल है,जिसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।इसमें मनकेसरी,खमदोडगी आदि के जलाशय तथा प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर जंगल पहाड़ देखने योग्य है।इसके अलावा उड़कुरा का जोगी गुफा,चंदैली,गांडागौरी,मोहपुर,कुलगाँव के शैलचित्र,आदि भी देखने योग्य है।

2.दूधनदी* -कांकेर का  दूध नदी का उद्गम कांकेर शहर को प्राचीन तथा नवीन में भागों में विभाजित करने वाली दूध नदी का उद्गम यहां से 17 किलोमीटर पर है जो मातंगा ग्राम के ऊपर से शुरू होकर सुंदर जलप्रपात के रूप में मलांज कुंड जलाशय में गिरती है ।यह एक बारहमासी पिकनिक स्पॉट है, जो चांदनी रात में और सुंदर दिखाई देता है ।
3.*मुत्ते खड़का जलप्रपात* -मुत्ते का अर्थ माडीया बोली में 'महिला' होता है तथा 'खड़का' प्रपात को कहते हैं। यह जलप्रपात आमाबेड़ा
 से 10 किलोमीटर दूर है। जिसकी भयंकर आवाज बारिश के दिनों में आमाबेडा तक सुनी जा सकती है ।
4.*कान्हा गांव का जलप्रपात*- कर्रा ग्राम से दक्षिण-पूर्व में तीन जलप्रपात क्रमशः 9 मीटर 10 मीटर तथा 28 मीटर ऊंचाई से गिरते हैं तथा सुंदर दृश्य बनाते हैं कान्हा गांव की एक गुफा में आदिमानव द्वारा बनाई गई रंगीन तथा सादी तस्वीरें देखने लायक है।यह कांकेर से बीस  किलोमीटर पश्चिम की ओर पीढ़ापाल के पास है ।
5*राव बेड़ा जलप्रताप-यह कांकेर से सत्ताईस किलो मीटर दूर कोरर के निकट ग्राम मिटगोल ग्राम के पास कोरकोटि नदी के  राव बेडा नामक दर्शनीय जलप्रपात बनाती है ।
6.*चर्रे मर्रे जलप्रपात और पिंजोडी घाटी- आमाबेडा तथा अंतागढ़ के मध्य स्थित यह एक संकीर्ण मार्ग वाली खतरनाक घाटी है। जिसके मध्य में ग्रेनाइट की विशाल चट्टानों से होकर कई फीट की ऊँचाई से चर्रे मर्रे जलप्रपात गिरता है ।यह अत्यंत गहराई में है। इसलिए अधिकतर लोग घाटी की सड़क से इस का नजारा देखते हैं। घाटी तथा प्रपात दोनों ही अत्यंत सुंदर दर्शनीय है। 
7.तरान्दुल घाट- यह कोरर से  बीस किलोमीटर दक्षिण में तरान्दुल घाट  अत्यंत सुंदर है ।जहाँ ब्रिटिश कालीन रेस्ट हाउस भी है ।घने वृक्षों  के कारण तरान्दुल को कांकेर जिले का कश्मीर कहा जाता है। जो सचमुच ठंडा पर्वतीय स्थल है।

8.दुधावा जलप्रताप-कांकेर के पूर्व की ओर दुधावा जलाशय हैं,
जो वास्तव में  रायपुर जिले के खेतों की सिंचाई के लिए बनाया गया था ।उत्तर बस्तर कांकेर जिले को दुधावा का बहुत कम पानी मिलता है। दुधावा का महत्व इस जिले के लिए मात्र पर्यटन स्थल का ही है ।यह भी बारहों माह का पिकनिक स्थान है। 

9.पखांजुर तथा परलकोट-पखांजुर में बंगला देश से आए हुए  शरणार्थियों द्वारा बसाया गया  शहर है।
 यहां से कुछ दूरी पर परलकोट पुरानी   जमींदारी एरिया है।जहाँ  के जमींदार गैंदसिंह ब्रिटिश कालीन प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहते हुए शहीद हुए
।आज  भी उनके इष्ट देवी  माई दंतेश्वरी  की यहाँ आराधना की जाती है ।

10.मातला घाटी-उत्तर बस्तर जिले की अंतागढ़ तहसील में मातला घाटी अत्यंत सुंदर है साथ ही दुर्गम भी है।

    इस तरह कांकेर जिले में प्राकृतिक धरोहरों से भरा हुआ है।

नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ .ग.)

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