जिला :- महासमुंद
विधा :- सायली काव्य विधा
शीर्षक :- बारिश
बादल,
गरजे खूब,
चमकती बिजली भी,
होगी रिमझिम,
बारिश।
चलती,
पवन पुरवाई,
काली घटा छाई,
मेघ बरसती,
मनभावन।
मोर,
पंख फैलाकर,
करे मोहक नृत्य,
झूमे विजन,
झंकृत।
भरेगा,
ताल लबालब,
बहेगी नदियां भी,
आएगा जब,
सावन।
खिलेगा,
कृषक मुख,
पुलकित मन होगा,
होगी फसलें,
सुनहरी।
व्याख्या :- प्रस्तुत पंक्तियों में रचनाकार ने सायली काव्य विधा का प्रयोग करते हुए बारिश के मनभावन मौसम का चित्रण करते हुए कहा है कि बारिश के मौसम में बादल गरजते हैं, बिजली चमकती है, काली घटा छाती है, मोर पंख फैलाकर नृत्य करता है, नदी - तालाब भर जाते हैं और खेतों में लहलहाती फसल देख किसान के मन में मुस्कान बिखर जाती है।
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