Wednesday, June 24, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- व्यथा

रचनाकार - संतराम कुम्हार 
राज्य- बलौदाबाजार (छ. ग.) 
रचना का शीर्षक - " गरीब की व्यथा "


विधा- पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार 

व्याख्या- गरीब परिवार की वर्तमान समय में लाॅकडाउन के कारण आर्थिक अर्जन के स्त्रोत मजदूरी  बंद होने के कारण भूख की तड़प तथा पुत्री वियोग का मार्मिक वर्णन किया गया है। 
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पल - पल  जीवन व्यतीत हो रहा था। 
मजदूरी मिले अब अतीत हो गया था। 

कैसे पढूँ अपनी जिंदगी की किताब..., 
पन्ने-पन्ने पर जख्म मुद्रित हो गया था।। 
मजबूर मैं, गरीबी ही कसूर हो गया।। 

बेसुध मेरी बच्ची,आस लगाये बैठी थी। 
पापा लायेंगें तो कुछ, भूख मिटाने को, 
मेरे रुह मेरा फफ्का,हालत उसकी क्यों ऐसी थी? 

गुहार मेरा पहले ना, फिर नामंजूर हो गया। 
हृदय टूट कर हाय, चकनाचूर हो गया।। 

बूँद-बूँद बारिश की बूँदे, टप-टप टपक रही थी। 
टूटी झोपड़ी,टूटा दिल,आत्मा मेरी कलप रही थी।। 
विलीन इन तंग हाली में कहीं, उसका नूर हो गया। 
मेरे हृदय का दुलारा, वह तारा मुझसे दूर हो गया।।
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विशेष:- पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार

36 comments:

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  2. बहुत ही बढ़िया👌👍👌👍

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  3. Very nice rachna sir

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  4. Very very very very very very very very very nice rachna sir God bless you sir

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  5. बेहतरीन रचना।

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  6. very very nice rachna sr jiii
    good

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  7. Nice poetry...go ahead...keep it up.

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  8. Very Nice bahut Badiya tarike se nitdhan garib ki vyatha par superb ����

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  9. Laxminarayan DewanganJune 25, 2020 at 1:20 AM

    Bahut Sunder..

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