Monday, June 29, 2020

जाँजगीर-चांपा से गिरधारी लाल चौहान के दोहे

नाम----गिरधारी लाल चौहान
जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---यमक अलंकार पर आधारित जीवन के उतार चढ़ाव
शीर्षक--- दोहे जीवन के उतार चढ़ाव के
व्याख्या--कवि के द्वारा जीवन से संबंधित उतार चढ़ाव  प्रभाव एवं प्रभावित करने वाले तत्वों का वर्णन किया गया है । 
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 दोहे जीवन के उतार चढ़ाव के

कल बिन कल का सोचना, भूल चुके सब लोग ।
सब कुछ कल पर छोड़ते,....उससे सबका योग  ।

पहले मन से ही चले,अब मन की ना बात ।
समय समय का फेर है, वही वही दिन रात ।

हार हार बहु बार भी,जीत जीत बहु बार ।
जीवन चढ़ उतार मिले, एक नहीं बहु बार ।

छल छल बहती धार से, छोटी नदी बखान ।
कपटी छल की आड़ ले,यह उसकी पहचान ।

सर सर हर हर शब्द से,मन अति भय समात ।
बाण नहीं यह पवना,....समझत मन मुस्कात।

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