जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---यमक अलंकार पर आधारित जीवन के उतार चढ़ाव
शीर्षक--- दोहे जीवन के उतार चढ़ाव के
व्याख्या--कवि के द्वारा जीवन से संबंधित उतार चढ़ाव प्रभाव एवं प्रभावित करने वाले तत्वों का वर्णन किया गया है ।
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दोहे जीवन के उतार चढ़ाव के
कल बिन कल का सोचना, भूल चुके सब लोग ।
सब कुछ कल पर छोड़ते,....उससे सबका योग ।
पहले मन से ही चले,अब मन की ना बात ।
समय समय का फेर है, वही वही दिन रात ।
हार हार बहु बार भी,जीत जीत बहु बार ।
जीवन चढ़ उतार मिले, एक नहीं बहु बार ।
छल छल बहती धार से, छोटी नदी बखान ।
कपटी छल की आड़ ले,यह उसकी पहचान ।
सर सर हर हर शब्द से,मन अति भय समात ।
बाण नहीं यह पवना,....समझत मन मुस्कात।
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