कुसमी छ. ग.
शीर्षक- कुछ सोच बड़े लड़के का..(हाइकु विधा में)
अब ख़ुद के
सपने कैसे जियूँ
बड़ा जो हूँ मैं
ज़िम्मेदारी है
मुझ पर क्या करूँ
कैसे करूँ मैं
संग मेरे तू
राधिका तू ही बता
कैसे करूँ मैं
अब ख़ुद के
सपने कैसे जियूँ
बड़ा जो हूँ मैं
अब सब तू
सब तेरे हवाले
तेरा नाम लू
तेरे हवाले
सब कुछ तेरा
अब मैं तेरा
भवार्थ - घर के बड़े लड़के की सोच
स्व रचित
रचनाकार- क्षितिज तिवारी
लक्की
कुसमी छ. ग.
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