जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-नारी
विधा-हाइकु(5-7-5)
कठपुतली
नहीं है नारी अब
आसमां छूती।
आत्मसुरक्षा
का कवच पहने
आगे बढ़ती।
अंतरिक्ष में
वो नये प्रतिमान
नित रचती।
कठिनाई के
हिम खंडों को नीर
बना बहती।
पीड़ा के तम
को चीर समता के
राह गढ़ती।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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