जिला:- महासमुंद
विधा :- हाइकु
शीर्षक :- छत्तीसगढ़ गौरव
तीजन बाई,
पद्मश्री गायिका है,
पण्डवानी की।
झाडूराम जी,
है जनक विख्यात,
पण्डवानी के।
हीरालाल जी,
है पाणिनी हमारे,
छत्तीसगढ़ी।
मंगल पांडे,
परसराम सोनी,
जी हैं हमारे।
गांधी हमारे,
पं. सुन्दर लाल जी,
सभी दिलों में।
पहाड़ी मैना,
राजकीय पंछी है,
है जंगल की।
वन शोभित,
साल व सागौन से,
हरित धरा।
जंगल में है,
झूमता वनभैंसा,
राजकीय है।
है गीत मिठी,
अरपा पैरी धार,
छत्तीसगढ़ी।
मैकाल श्रेणी,
है पश्चिम सीमा में
हिमालय सा।
है महानदी,
बहती हृदय से,
निर्मल धारा।
व्याख्या:- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने हाइकु विधा का प्रयोग करते हुए छत्तीसगढ़ के गौरवशाली पक्षों को पिरोने का प्रयास किया है।
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