Tuesday, June 23, 2020

राजनांदगाँव से पद्मा साहू की रचना- भजन


भजन... जगन्नाथ प्रभु ल सुमिरन करके,,,,
रचनाकार श्रीमती पद्मा साहू 
खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़



जगन्नाथ प्रभु ल सुमिरन करके,
 मोर मन मा आनंद छागिस।
प्रभु के किरपा मोला मिलिस,
 प्रभु के दया मोला मिलिस।
जगन्नाथ प्रभु,,,,,,,

 विपदा के भंवर में ,
 भटकिस जब मोर जीवन नइया।
 मंजिल पाना मुश्किल रहिस,
 नइ मिले कौनो खेवईया ।
 जगन्नाथ प्रभु खेवईया मोर नइया के,
प्रभु विपदा ले मोला उबारीस।
जगन्नाथ प्रभु के सुमिरन करके
मोर मन मा आनंद छागिस,,,,,,

 सदा प्रभु साथ रहीस मोर,
 मोर आँखी देख नहीं पावे।
 मैं बपरी माया के रंग में रंग के,
 मोर मन प्रभु ल भुला जावे।
 जब -जब मैं ठोकर खायेंव,
 प्रभु पग -पग मोला उठाईस।
 जगन्नाथ प्रभु ल सुमिरन करके मोर मन मा  आनंद छागिस,,,,

गोकुल, मथुरा मा तोरेच माया छाए रहिस ,
गऊ,ग्वाल मन तोरेच छाया म रहिस।
शांताकार  निर्लेप प्रभु  मोर ,
हर रूप में तोरे स्वरूप रहिस।
 देवकी ,यशोदा तोर चरण म,
राधा के त्याग तोरे संग मर रहिस।
जगन्नाथ प्रभु ल सुमिरन करके,   
 मोर मन मा आनंद छा,,,,,,

दुनिया ल संवारे बर प्रभु,
कतको रूप धरे तैं।
बेसहारा मन के सहारा बने,
 सबके बेड़ा पार करे तैं।
भक्तिन दाई कर्मा तोला अपन हाथ ले,
जगन्नाथ मा खिचड़ी खवाइस।
जगन्नाथ प्रभु ल सुमिरन करके,
मोर मन मा आनंद छागिस,,,,,
सादर समीक्षार्थ


श्रीमती पदमा साहू 
खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़

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