ब्लॉक:- प्रेमनगर, जिला:- सूरजपुर, छत्तीसगढ़
विधा:- कविता
रस:- वीर रस
शीर्षक:- देश के वीर जवान
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अंग अंग चतुरंग सैन मन उमंग धरि,
रण में युद्ध जीतन चलत है।
शत्रु देखत सैन्य पराक्रम को,
मन ही मन भयभीत हो हाथ मलत है।
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कितने वीर इस धरती में जन्म लिए,
वीरों का देश है मेरा हिन्दुस्तान।
पराक्रमी वतन की रक्षा खातिर शहीद हुए,
भगत सिंह, आजाद, बोस और सुल्तान।
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क्रोध हुए तो दुश्मन थर थर कांपे,
रक्त रंजीत हो रणभूमि जब किये प्रहार।
बढ़ते कदम अब रुक नहीं सकता,
काल रूप धरे शत्रु का करता है संहार।
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शत शत नमन उन बलिदानियों को,
जिसने किया प्राणों का कुर्बान।
ऐसे वीर जांबाज,पराक्रमी,सपूतों पर,
देश को गर्व और है अभिमान।
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देशद्रोहियों का चैन सुख छीना,
कर दिया उन डकैतों का बदहाल।
सात पुस्तों तक कभी भूल नहीं पाएंगे,
ऐसा कर दिखाया तूने कमाल।
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व्याख्या:- देश के वीरों के पराक्रम का वर्णन किया गया है, जो देश की रक्षा खातिर अपने प्राणों का न्यौछावर कर दिए।
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कृष्ण कुमार ध्रुव "सृजन"
बहुत सुंदर ध्रुव सर
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना है भाई बधाई हो
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