निवास - पेंडरवानी ,बालोद,छ. ग.
विधा - सायली छंद
शीर्षक - सावन
सावन !
मस्त , गाता
गुनगुनाता हरियाली लाता
बेरंग धरा
मुस्काई ,
सावन
प्रतीक प्रणय
विरहनियों को तपाती
मूसलाधार जल
बरसाती
सावन
चौमास सुहाना
बदरा रस बरसाए
किसान अन्न
उपजाए
सावन !
बिन बरसे
दगा देकर हमको
वापस मत
जाना
फिर
हम बसरसेंगे
जग तरसेगा फिर
अन्न को
समझना
- - शैलेन्द्र चेलक - -
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