Friday, June 5, 2020

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- प्रकृति और मानव

रचनाकार  सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला  बेमेतरा (छ ग)
शीर्षक प्रकृति और मानव
दिनांक ०५/०६/२०

ईश्वर ने मानव को जीवन जीने के लिए बहुत ही अच्छी प्रकृति प्रदान की, शुद्ध जल ,वायु प्रदान किए तरह तरह के फल फूल, खनिज संपदा प्रदान की है इसलिए हमें उस ईश्वर और प्रकृति का नमन करना चाहिए।

 मानव को प्राप्त हुए हैं,
सुन्दर स्वच्छ प्रकृति जल वायु।
और मिले उसे तरह तरह के,
फल फूल अनाज खनिज संपदा भारी।
शत शत नमन उस ईश्वर को, जिसने हमें ये प्रदान किया।
शत शत नमन उस प्रकृति को,
जिसने अपना भंडार दिया।

  पर मानव इस प्रकृति का उपयोग करने तक सीमित नहीं रहा। वह इसका दोहन करने लगा है। हजारों, लाखों पेड़ पोधे काटकर बड़े बड़े कारखाने, बनाए जा रहे है बड़े बड़े बिल्डिंग बनाए जा रहे है पर उसके अनुपात में पेड़ नहीं लगाए जा रहे है जो कि शासन द्वारा अनिवार्य भी है, पर आज के समय में पेड़ केवल कागज पर लग रहे है जो फाइलों में ही फल फूल रहे हैं।
 
 ऐ मानव प्रकृति का तू,
उपयोग कर दुरुपयोग ना कर।
ये तेरे लिए समर्पित,
तू भी इसके प्रति समर्पित भाव रख।
मानते हैं हम विकास के लिए,
कारखाने फैक्ट्री जरूरी है।
पर उसी अनुपात में तो,
पेड़ रोपना भी जरूरी है
तभी संतुलन बना रहेगा,
तभी प्रकृति सही रहेगी।
पर आज पेड़ों का रोपण तो,
कागजों तक ही सीमित है।
जितना हो सके मानव,
प्रकृति के दोहन पर अडिग है।

     इसी का दुष्परिणाम है कि आज वातावरण दूषित हो गया है कई प्रकार की नई नई बीमारियां पैदा हो रही है। मानव अब भी समय है सुधर जाओ और प्रकृति को सजाना संवारना उनका संरकछन करना प्रारम्भ कर दो। नहीं तो वह दिन दूर नहीं जिस प्रकृति ने तुम्हे जीवन दिया वहीं तुम्हारे विनाश का कारण बन सकती है।
  
आज जल वायु दूषित है,
आज वातावरण प्रदूषित है।
जन्म ले रही कई बीमारियां,
जिनका नहीं उपचार है।
सुधर जा अब भी समय है मानव,
प्रकृति की रक्षा कर ले।
अभी भी समय है अय मानव,
प्रकृति को तू खूब सजा ले।
नहीं तो फिर समय नहीं मिलेगा,
यही तेरा विनाश करेगी।
सुधर जा सुधर जा सुधर जा,
मानव अब तो सुधर जा।
प्रकृति का केवल दोहन मत कर,
प्रकृति को सजाना संवारना भी सीख ले......

 सूर्य प्रकाश पाटिल

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