Tuesday, June 23, 2020

रायगढ़ से जगतसिंह ठाकुर'बंजारीवाले' की रचना- जगदीश रथयात्रा

रचनाकार–जगतसिंह ठाकुर'बंजारीवाले'
स्थान--सारंगढ़ , जिला--रायगढ़ { छग }
विधा--दोहा छन्द
शीर्षक--'जगदीश रथयात्रा'


सारे  जगत  के  स्वामी , विश्वपति  जगन्नाथ !
तेरी  कृपा  से   प्रभुजी , करना  हमें  सनाथ ।।१।।
परब्रह्म        सृष्टिकर्ता ! तेरी   शक्ति  अपार ।
हे   विश्व  पालक   तेरी ! महिमा  अपरम्पार ।।२।।
बलभद्र   आप  सुभद्रा , तीनों   मूरत   साथ ।
तीनों  के   श्रीचरण  में , सदा  झुकाऊँ माथ ।।३।।
अपनी मौसी  गेह तक , करने   को  प्रस्थान ।
गुण्डिचा तक जाने को , निकले दयानिधान ।।४।।
मात्र एक  झलक पाने , जुटती  भीड़ अपार ।
दर्शनार्थी      दर्शनकर , करते  जयजयकार ।।५।।
होती  सजावट रथ की , खूब   नयनाभिराम ।
ध्वज-पताका  फहराते , नवीन वस्त्र  तमाम ।।६।।
रथपर बैठ प्रभु निकले , भक्त के  मन उमंग ।
लोग  अनेक  नाच  रहे , लेकर   झाँझ-मृदंग ।।७।।
घुँघरू   बाँध   पैरों   में , दिखाते ताल -माल ।
संचार     में      संचारी , करते  खूब कमाल ।।८।।
मनोहारी     होता     है , उनका  सारा  भाव ।
उनके  कथन  में  होता , ज्ञान का भी प्रभाव ।।९।।
देखके  रथपर प्रभु को , अनेक भक्त अनन्य ।
पुलकित मन  होते  रहे , मानें  खुद को धन्य ।।१०।।
नर - नारी  दरश  करने , आते  वृद्ध - जवान ।
बच्चों  की  भीड़  भारी , पहिने नव परिधान ।।११।।
मिष्ठान्न   खा   खरीदते , खिलौने बहु प्रकार ।
देते  'ठाकुर'  पर्व   सब , खुशी- प्रेम-संस्कार ।।१२।।
                    ०×××××××०
व्याख्या--जगदीश जगन्नाथ स्वामीजी के महिमा की
              वर्णन एवं रथयात्रा का चित्रण ।

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