Wednesday, June 17, 2020

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल कृत- संस्मरण

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा (छ ग)
विधा संस्मरण
शीर्षक भटरी महराज

        मै भटरी, जादू टोना, भूत प्रेत, भविष्यवाणी इत्यादि पर ज्यादा विश्वास नहीं करता था, पर एक दिन मेरे एक खास मित्र के घर एक भटरी महराज से भेंट हुई। उसी के संबंध में है आज की मेरी संस्मरण।
                  बात उन दिनों की है जब हम कॉलेज में थे। कुछ बहुत खास मित्र थे अभी भी है खास जिनमे सोहन, अभिशेष , सुशील, जगदीश, चंद्रेश ,रंगु जिनके घर अक्सर जाना होता था और भी बहुत खास मित्र थे, है, परंतु वे दूसरे शहर व गांव से थे इस कारण उनसे मिलना कम हो पाता था। सोहन का घर हम सभी दोस्तों के मिलने की पसंदीदा जगह थी अक्सर हम वहीं मिला करते थे। चूंकि हम सभी विवाह योग्य हो रहे थे, दोस्तों के बीच एवम् उनके घर पर चर्चा होनी प्रारम्भ हो गई थी की किसकी दुल्हन कैसी होगी। मै पाटिल सरनेम लिखता हूं, पटेल समाज से हूं मेरी जाति मरार है। उस समय हमारे समाज में लड़कियों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था, इसकारणमेरी मानसिकता या सोच के कारण मेरा जवाब यही होता था- मुझे ५ वी ८ वीं पास गोबर बिनने या बारी कमाने वाली मिलेगी।
                 एक दिन की बात है मै सायकल से अचानक सोहन के घर पहुंचा।सभी(सोहन, मां, तीनों बहन पार्वती, लुमेश गिरजा) बैठे हुए थे और एक सज्जन थे, जिनको पहनावे से ही मै पहचान गया कि ये कोई साधु या भटरी है। मुझे देखते ही मां बोली- भटरी महराज सूर्या आगे बता तो येला कई सने दुल्हन मिलही । मै इंकार करता रहा पर सब जिद कर रहे थे। भटरी महराज मस्तक देखकर बताते थे। उन्होंने मेरा मस्तक देखकर बताया- येकर दुल्हन हा ई ही भिलाई, दुर्ग के आस पास मिलही, पढ़े लिखे मिलहि, सुंदर        
अ ऊ बुद्धिमान होहि। मैंने उनकी बात को मजाक में लिया पर सभी मेरी खिचाई करने लगे ।२००७ में मेरा विवाह हुआ। भटरी महराज ने जो कहा था वह एक एक शब्द सही निकले। आज मै उस भटरी महराज को याद करता हूं और मन ही मन सोचता हूं कि फिर उनसे एक बार भेंट हो जाए.......


 सूर्य प्रकाश पाटिल

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