महासमुन्द, छत्तीसगढ़।
शीर्षक; "छत्तीसगढ़ महतारी"
विधा:गीत(छत्तीसगढ़ी)
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तोर कोरा म बड़ सुख पायेंव,
मोर छत्तीसगढ़ महतारी।।
रहि-रहि के बड़ इतराएंव,
मोर छत्तीसगढ़ महतारी।।
जंगल झाड़ी ,डोंगरी पहाड़ी,
सरग असन मोला लागे।।
खेती किसानी करत नंगरिहा,
झुमरय तोरे गीत ल गाके।।
कोरा म मन भर नींदरी भांजेंव,
खुलकत हाँसत जागेंव,
मोर छत्तीसगढ़ ................
बिजली,बाक्साइड,हीरा म,
तोरेच हे मालगुजारी।
जड़ी बुटी हे जंगलिहा अउ,
कोदो तिलि के नइहे लचारी।।
चाउर दुबराज ह बड़ ममहावै,
राहेर मूँग ल खाके अघायेंव,
मोर छत्तीसगढ़............
सुवा ददरिया करमा घलो ह,
इंहा के हावै चिनहारी।
तीजा पोरा राखी बंधना हे,
फागुन रंग बाजा म देवारी।
गुल्ली डंडा,बांटी भौरा खेलेन,
गउरी गउरा घलो परघाएंव ,
मोर छत्तीसगढ़ महतारी,
तोर कोरा म बड़ सुख पाएंव ,
मोर छत्तीसगढ़ महतारी ।
रहि रहि के बड़ इतराएंव,
मोर छत्तीसगढ़ महतारी ।।
द्रोपती साहू 'सरसिज'
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