जिला :- महासमुंद
भाव :- उत्साह
रस :- वीर रस
शीर्षक:- वीर नारायण सिंह
विधा:- कविता
नाम से जिसके,
बना छत्तीसगढ़,
वीरता की खान,
जिसके करामातों की,
हम गाते गौरव गान,
सोने जैसा पूत जना,
जननी सोनाखान।
देश में जब कोने कोने में,
था अंग्रेजों का साया,
अंग्रेजों से लोहा लेने,
वीर सपूत एक आया,
ललकार उनकी ऐसी थी,
ज्यों दहाड़ते सिंह,
नाम से जग थर-थर कांपे,
नाम वीर नारायण सिंह।
ना सह सका जनता का दुख,
धन अमीरों से लूट गया,
फूल बिछाए राहों में जन के,
निज के पैरों में शूल गया,
सुख - चैन मिले जन - जन को कहकर,
निज के सुख - चैन भूल गया,
मातृभूमि की सेवा में,
वह हंसते- हंसते झूल गया।
व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने छत्तीसगढ़ के वीर सपूत शहीद वीर नारायण सिंह की वीरता का बखान किया है।
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