जिला -राजनांदगाँव(छ.ग.)
शीर्षक-अब की बरस बरखा
!!अर्जी- विनती!!
-----------------------------------------
अब की बरस बरखा, कृपा कर देना !
उजड़े चमन को ,गुलजार कर देना !!
कर्ज के बोझ में दब गया हूँ ,
और भार सहा नहीं जाता !
साहूकार रोज आते हैं ,
लेकर खाता !!
खेतों की फसल को ,हरियाली कर देना !
अब की बरस बरखा, कृपा कर देना !!
अकाल की मार लगातार पड़ रहे है,
कर्मठ किसान लाचार हो रहे है !!
घर में भोजन की किल्लत हो रहे हैं !
बच्चें भूखे -प्यासे सो रहे हैं !!
बेबस किसान के पीड़ा हर देना !
अब की बरस बरखा, कृपा कर देना !!
कलियाँ खिल नहीं रही हैं,
नदी -नाले सुख गई है !
लताएँ उदास बैठी है,
जलधाराएं टूट गई है !!
दूजराम के जीवन में ,खुशियाँ भर देना!
अब की बरस बरखा, कृपा कर देना !!
No comments:
Post a Comment